बच्चों को जूस पिलाएं और फल खिलाएं मिलेगा भरपूर पोषण

कुछ बच्चे नाश्ते या किसी भी समय फल खाने की बजाय जूस पीना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे अभिभावक भी संतुष्ट रहते हैं कि बच्चे ने कुछ तो पौष्टिक पीया। अमरीकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार जूस पीने की बजाय फल खाना ज्यादा फायदेमंद है। हर उम्र के अनुसार जूस की मात्रा भी अलग होती है।

कई शोधकर्ता स्टीवन अब्राम्स के अनुसार फलों का जूस निकलने के बाद इनमें विटामिन व फाइबर की मात्रा घट जाती है जिससे दांतों को नुकसान होता है।

ओहियो के फैमिली फिजिशियन गैरीलेरॉय ने माना कि जरूरत से ज्यादा चीजों को लेना नुकसानदेय है।

इन्होंने बच्चों को खाने के लिए 5-2-1-0 फॉर्मूले को उपयोगी बताया। 

  • दिनभर में पांच बार फल व सब्जियां खाना
  • दो घंटे से कम गैजेट का प्रयोग
  • एक घंटे फिजिकल एक्टिविटी 
  • न के बराबर जीरो शुगरी ड्रिंक। जूस पिलाना भी है तो कोशिश करें कि उसमें पानी न हो, 100% रस हो।

 

बच्चों को कितना जूस पिलाएं?

  • यह मात्रा तय स्कूल जाने वाले 7-18 वर्ष के स्टूडेंट्स को दिनभर में लगभग 2 लीटर तक।
  • 4-6 वर्ष के बच्चों को आधा से एक कप की मात्रा में।
  • शिशुओं को जूस बिलकुल नहीं पिलाना चाहिए।

 

जूस के अलावा क्या पिलाएं?

फलों के जूस के अलावा सूप, दूध, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी या फ्रूट रायता भी ले सकते हैं। घर पर फलों से तैयार आइसक्रीम या केक भी खा सकते हैं

बच्चों को मोटापे से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके

सब्जियों का सूप पौष्टिक

लिक्विड डाइट के रूप में जूस के बजाय बच्चों को फलों से तैयार रायता या सब्जियों का गुनगुना सूप दे सकते हैं। फलों की प्रकृति पेड़ से तोड़कर व धोकर सीधे खाने की है, पर प्रयोग का तरीका हमने अपनी सुविधा अनुसार कर लिया है।

बच्चों के मुंह में छाले, दांत संबंधी कोई रोग या किसी अवस्था में वह कुछ न खा पाए तो ही फलों का ताजा जूस बिना छानें दें। इससे इसमें पौष्टिक तत्वों की मात्रा बनी रहेगी।

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