वृद्ध अवस्था में याददाश्त कमजोर क्यों होती है और शरीर में दर्द होने का कारण

वृद्ध अवस्था में व्यक्ति के शरीर में दर्द ना हो और याददाशत कमजोर नहीं पड़े। ना ही सोचने की क्षमता कमजोर हो पाए। इसके लिए बुजुर्गों को टुकड़ों में आने वाली नींद लेने से बचना चाहिए और जीवनशैली में बदलाव करें।

याददाश्त कमजोर क्यों होती है?, बुजुर्गों को कितनी नींद लेनी चाहिए?, गहरी नींद लेने के फायदे, क्यों होता है बुजुर्गों के शरीर में दर्द?, पूरे शरीर में दर्द किस बीमारी के कारण होता है?, बुजुर्गों के शरीर के दर्द का इलाज, इंटरवेंशन पेज मैनेजमेंट से भी मिलता है आराम

1. याददाश्त कमजोर क्यों होती है?

शांत नींद नहीं लेने के कारण ब्रेन में सूजन आना शुरू हो जाता है। ब्रेन की कुछ कोशिकाओं की एजिंग तेज होने से कॉग्नेटिव फंक्शन कम होते हैं।

इससे उनकी याददाशत और सोचने की क्षमता कम हो जाती है। क्योंकि दिमाग और शरीर के बीच में एक हारमोनी होती। सरकेडियम रिदम में दिमाग व शरीर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।

 

नींद न टूटे

रात में नीद पूरी होने पर ही इस रिदम का शरीर पर असर पड़ता है। नींद बाधित होने के साथ-साथ यह रिदम भी प्रभावित होती है।

इससेकई तरह की साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम रहना शुरू हो जाता है। साथ ही सिरदर्द व तनाव रहना सामान्य है।

ऐसे में, बुजुर्गों को डिमेंशिया होने की संभावना बढ़ जाती है। उम्र डेढ़ साल तक हो जाती है। 

 

बुजुर्गों को कितनी नींद लेनी चाहिए?

डिमेंशिया बीमारी से बचने के लिए बुजुर्गों को आठ घंटे की प्रॉपर स्लीप लेनी चाहिए। जिन कारणों से रात में नींद डिस्टर्ब होती है। उन कारणों को दूर करना चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति को प्रोस्टेट या रात में बार-बार यूरीन जाने की बीमारी है। इसका इलाज करवाएं।

ताकिरात में नींद टूटे नहीं। वे साउंड स्लीप ले सके। याददाश्त बनी रहे। साइंस एडवांस जर्नल में यह स्टडी प्रकाशित हुई हैं। 

 

गहरी नींद लेने के फायदे

एक अन्य स्टडी में यह भी पाया गया है कि गहरी नींद लेने से 

  • ब्रेन में मौजूद कुछ प्लार्क क्लियर होते हैं। 
  • ब्रेन में सर्कुलेशन बढ़ता है।
  • ब्रेन एक्टिव व हैल्दी रहता है।
  • व्यक्ती की याददाशत लंबे समय तक बनी रहती हैं। 

 

इसलिए ओल्ड एज में व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। वहीं, पार्किंसन पेशेंट्स में स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर हो सकता है। वह रात में उठकर चिल्लाता है।चिल्लाने

और खुद को नियंत्रित रख पाने से पेशेंट व पार्टनर को चोट भी लग सकती है। ऐसा करके फिर वो वापस सी जाता है।

 

2. क्यों होता है बुजुर्गों के शरीर में दर्द?

अगर आपके शरीर में दर्द हो रहा है और आप डॉक्टर को दिखाते हैं आपको अगर डॉक्टर कहते हैं कि आपको कोई बीमारी नहीं है तो इसका अर्थ यह है कि कोई गंभीर या बड़ी बीमारी नहीं है।

 

पूरे शरीर में दर्द किस बीमारी के कारण होता है?

एक बीमारी होती है, जिसे फाइब्रो मायल्जिया कहते हैं। इसमें शरीर में दर्द होता है लेकिन कारणों का पता नहीं चलता है।

ऐसेमामलों में दर्द का कारण नहीं मिलने से मरीज को मानसिक परेशानी होने लगती है। इसे क्रॉनिक वाइड स्प्रेड कहते हैं।

 

बुजुर्गों के शरीर के दर्द का इलाज

इसमें जीवनशैली में बदलाव कर दर्द को कम किया जा सकता है। कई बार थोड़ी दवा और फिजियोथैरेपी से भी आराम मिलता है। ऐसे मरीजों को जेंटल एरोबिक्स की सलाह दी जाती है।

कई बार इन मरीजों को काउंसलिंग की भी जरूरत पड़ती है। काउंसलिंग से उनके अंदर की नकारात्मकता दूर की जाती है। इस तरह दर्द से भी राहत मिलती है।

 

इंटरवेंशन पेज मैनेजमेंट से भी मिलता है आराम

कई बार किसी नस के दबने से दर्द होता है। ऐसे में इंटरवेंशन पेन मैनेजमेंट के तहत कुछ दवाइयां या इंजेक्शन भी लगाते हैं।इनसे

नसों में होने वाली रुकावट या सूजन कम होती है। इससे मरीज को आराम मिलता है।

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