रात में बुरे सपने क्यों आते हैं?

कई बार बच्चों को इतने बुरे सपने आते हैं कि वे उठकर बैठ तक जाते हैं। क्लीवलैंड क्लीनिक में प्रकाशित शोध के अनुसार 3 से 6 वर्ष के 10 – 100 फीसदी बच्चों को रात में बुरे सपने आते हैं।

सामान्यतः बुरे और डरावने सपने बच्चों के बहुत अधिक थके होने या फिर तनाव के कारण आते हैं। खासकर ऐसे बच्चे जिन हाल ही में किसी बात से आघात पहुंचा होता है।

उन्हें डरावने सपने अक्सर आते हैं। शोधों के अनुसार लड़के और लड़कियों में डरावने सपने अलग-अलग उम में आते हैं। लड़कों की तुलना में लड़कियों को 12 वर्ष के बाद इस तरह के सपने अधिक आते हैं। बच्चों के विकास के साथ सपनों के विषय में परिजन पाया गया है।

सपना क्या है?

सपने एक तरह से मतिभ्रम है जो कि नींद की एक विशेष स्टेज के दौरान आते है। खासकर रेपिड आई मूवमेंट स्लीप के समय की संख्या सवाधिक होती है।

नींद की अवस्था सोने के 90 मिनट बाद शुरू होती है। आमतौर पर सपने जीवन के मुद्दो पर आधारित होते हैं।

 

बच्चों को बुरे सपनों से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

नेशनल हेल्थ इंस्टिट्यूट में प्रकाशित शोध के अनुसार यदि बच्चों को लगातार बुरे सपने आते हैं तो इन तरीकों को अपना सकते हैं।

 

1. बच्चों के सोने का समय निर्धारित करें और नमी पर सोने के लिए प्रेरित करें। 

 

  1. उनके सपने की आखिरी बात पछें और नोट करने के लिए कहें।

 

  1. लंबी सांस लेने की एक्सरसाइज कराएं।

 

  1. बच्चों के कमरे में नाइट लाइट का इस्तेमाल करें।

 

  1. हो सके तो रात में बेडरूम का दरवाजा रात में खोलकर रखें।

 

तनाव, बेचैनी और दवाइयों के कारण भी आते हैं बुरे सपने

हेल्पलाइन में प्रकाशित शोध के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार जैसे कि अवसाद, एंग्जाइटी, बाइपोलर डिसआर्डर और अन्य मूड संबंधी स्थितियों के चलते भी कई बार विचलित करने वाले, सकारात्मक और ईरान सपने आ सकते हैं।

कई बार इनके इलाज के लिए ली जाने वाली एंटी-डिप्रेसेंट्स और एंटी साइकोटिक्स दवाइयों के कारण भी बुरे और विचलित करने वाले सपने आते हैं।

उसके बदलाव के साथ ये सपने बदलते रहते हैं।

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