इन बीमारियों का संकेत हो सकता है अलग-अलग रंग का यूरिन, कहीं आपको तो नहीं आता रुक-रुक के पेशाब जानें क्या है कारण

यूरीन के रंग और इसकी मात्रा से कई बीमारियों का डायग्नोस करना आसान है। अगर शुरुआत में ही इस पर ध्यान दिया जाए तो पहले स्टेज पर कई बड़ी बीमारियों से बचाव संभव है।

हालांकि, सामान्य व स्वस्थ व्यक्ति का यूरीन हल्के पीले रंग का होता है, लेकिन कुछ दवाइयों के कारण यह गहरा पीला या लाल हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति दवाइयां नहीं ले रहा है। इसके बावजूद भी रंग गहरा लाल और पीला है। इसे नजरअंदाज के बजाय टैस्ट करवाने चाहिए।

कई बार पीलिया होने की वजह से रंग गहरा पीला हो सकता है। वहीं, मांसपेशियों में डैमेज होने के कारण भी यूरीन का कलर लाल हो जाता है। यह मायोग्लोबिनयूरिया बीमारी कहलाती है।

यूरिन टेस्ट

साधारण यूरीन टैस्ट के जरिए इसे डायग्नोस कर सकते हैं। कुछ मरीजों में ब्लड और आरबीसी की एक सैल निकलने के कारण भी यूरीन का रंग लाल हो जाता है। यह एक अलार्मिंग स्टेज है, जो कैंसर और स्टोन डिजीज का संकेत देती है।

यूरीन का बॉयो कैमिकल टैस्ट करके इन्हें डायग्नोस कर सकते हैं। कलर के साथ-साथ पीएच लेवल, एसिड भी देखना जरूरी है।

 

पथरी होने पर आते हैं पेशाब में क्रिस्टल

कई बार स्टोन के कारण पेशाब के साथ अलग-अलग तरह के क्रिस्टल निकलते हैं। इससे स्टोन डिजीज होने के चांस बढ़ जाते है।

दूसरी तरफ यूरीन पास करते वक्त जलन हो रही है। दर्द और फीवर आ रहा है। ऐसा यूरीनरी ट्रैक इंफेक्शन में हो सकता है।

यूरीन से आरबीसी निकल रहा है तो शरीर के किसी हिस्से में ब्लड लीक होने, ट्यूमर, ब्लड कैंसर की संभावना हो सकती है। यह संभावना उन लोगों में ज्यादा होती है, जिनकी उम्र 40 साल से ज्यादा है। वे तंबाकू का सेवन करते हैं।

ज्यादा मात्रा में प्रोटीन निकलना और पैरों में सूजन आना यूरीनरी पार्ट में कमजोरी आने का लक्षण हो सकता है। 

डायबिटिक लोगों में भी कभी-कभी शुगर व प्रोटीन ज्यादा निकलता है। जलन व दर्द के साथ पस आना और रात को बिस्तर गीला करना। यह किसी तरह के यूरीन में इंफेक्शन की वजह से भी हो सकता है। 

डायबिटीज, कुछ हॉमोंस की कमी होने, ज्यादा पानी पीने और हार्ट की दवाइयां लेने से व्यक्ति यूरीन ज्यादा जाता है।

 

यूरिन कम आने का कारण

इसके अलावा व्यक्ति का यूरीन ज्यादा व कम जाना भी किसी बीमारी का अलामिंग स्टेज है।

प्रोस्टेट थैली की बीमारी में यूरीन की मात्रा कम और यूरीन पास करते वक्त रुकावट महसूस होती है। यूरीन और किडनी इंफेक्शन में ऐसा हो सकता है। डायबिटीज में में शुगर और कीटोंस की मात्रा बढ़ जाती है।

यूरीनरी तंत्र में खराबी आने पर भी खून आना शुरू हो जाता है। इन लक्षणों के आधार पर बीमारी को डायग्नोस करते हुए इलाज शुरू कर देना चाहिए।

Credit- डॉ. विनय तोमर, डॉ. एस.एस यादव, यूरोलॉजिस्ट, एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुर

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *